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डिजिटल गोल्ड बनाम फ़िजिकल गोल्ड: क्या डिजिटल इनवेस्टमेंट बेहतर है?

April 21, 2023

Table of Contents

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      फ़िजिकल गोल्ड और डिजिटल गोल्ड में क्या अंतर है? क्या डिजिटल गोल्ड में इनवेस्टमेंट करना सही है? डिजिटल गोल्ड में इनवेस्टमेंट करने पर फ़ैसला करने से पहले, आपको ये ज़रूरी बातें जाननी चाहिए।

      हम भारतीयों को सोना बहुत पसंद है। है न? चाहे वह सोने के गहने हों, सोने के सिक्के हों या बिस्कुट।  हम सोने का इस्तेमाल अलग-अलग तरह से करते हैं।

       

      हम इसे न केवल धन और समृद्धि के प्रतीक के तौर पर देखते हैं, बल्कि बढ़ती महंगाई के असर को देखते हुए एक इनवेस्टमेंट के तौर पर भी देखते हैं।

       

      इस क़ीमती धातु में निवेश करने से म्यूचुअल फंड और स्टॉक जैसे दूसरे ज़्यादा ज़ोखिम वाले इनवेस्टमेंट में होने वाले नुक़सान को बेअसर करने में मदद मिलती है।

       

      अब जैसे-जैसे पूरी दुनिया डिजिटल हो रही है, डिजिटल गोल्ड और ज़्यादा लोकप्रिय होता जा रहा है।

       

      इस लोकप्रियता का कारण क्या है और यह हमारे घरों में मौजूद सोने से कैसे अलग है? इसे जानने के लिए Jar के पास आपके लिए एक गाइड है:

       

      डिजिटल गोल्ड क्या है?

       

      डिजिटल गोल्ड, फ़िजिकल सोने का एक विकल्प है। यह एक्सचेंज रेट में बदलाव और उतार-चढ़ाव से मुक्त होता है और इनवेस्टर को वास्तव में फ़िजिकल सोने के बिना, दुनिया भर में आसानी से व्यापार करने की सहूलियत देता है।

       

      भारत में आप कई ऐप और वेबसाइट के ज़रिए डिजिटल गोल्ड ख़रीद सकते हैं। हालांकि, केवल तीन  गोल्ड कंपनियां - ऑगमोंट गोल्ड लिमिटेड, डिजिटल गोल्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड - सेफ़गोल्ड, और एमएमटीसी-पीएएमपी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ही आपका सोना रखती हैं।

      यह ऑनलाइन सोना ख़रीदने और इसमें इनवेस्ट करने का एक सुरक्षित, सुविधाजनक और किफ़ायती तरीक़ा है, जिसमें किसी अतिरिक्त स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट की भी ज़रूरत नहीं होती है।

      यहां जानें कि आप Jar के साथ डिजिटल गोल्ड में कैसे इनवेस्टमेंट कर सकते हैं।

       

      डिजिटल गोल्ड बनाम पारंपरिक गोल्ड

       

      1. इनवेस्टमेंट का आकार: फ़िजिकल गोल्ड में इनवेस्टमेंट करते समय आपको कम से कम 1 ग्राम सोना ख़रीदना होता है, जिसकी क़ीमत में हर रोज़ उतार-चढ़ाव होता है। जबकि, डिजिटल गोल्ड में इनवेस्टमेंट करना बहुत ही किफ़ायती है और इसे 1 रुपए तक की कम क़ीमत में भी ख़रीदा और बेचा जा सकता है। यह किफ़ायती है और अपनी सीमित आय के बावजूद भी आप आसानी से डिजिटल गोल्ड में इनवेस्टमेंट कर सकते हैं।

       

      2. स्टोरेज: हमने आमतौर पर हमारे भारतीय घरों में अपने बुजुर्गों को फ़िजिकल सोना लॉकर में रखते देखा है। यह बहुत ज़ोखिम भरा होता है, क्योंकि इसमें चोरी होने का डर हमेशा रहता है। ज़ोखिम से बचने के लिए इसे लंबे समय तक बैंक लॉकर में रखा जाता है, जिसके लिए रजिस्ट्रेशन फ़ीस, वार्षिक फ़ीस, सर्विस फ़ीस वग़ैरह के तौर पर स्टोरेज कॉस्ट देनी पड़ती है।

       

      डिजिटल गोल्ड आपको लंबे समय तक के लिए इनवेस्टमेंट और लागत की समस्याओं से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। यह सेफ़ फ़्री है या फ़ेस वैल्यू पर इंश्योर्ड है।

       

      3. उच्च लिक्विडिटी: दूसरे तरह के संपदा/एसेट की तुलना में सोना सबसे ज़्यादा लिक्विड कमोडिटी है। हालांकि, फ़िजिकल गोल्ड के साथ अभी भी लिक्विडिटी की समस्याएं रहती हैं। जैसे: फ़िजिकल सोने को बेचने और इसके लिए पूरी-पूरी रीसेल वैल्यू पाने के लिए इसे उसी डीलर को बेचना पड़ता है, जिससे आपने इसे ख़रीदा था। पूरी रीसेल वैल्यू पाने के लिए ओरिजनल ख़रीद बिल रखना भी एक ज़रूरत होती है।

       

      डिजिटल गोल्ड कहीं भी और कभी भी आसानी से ख़रीदा और बेचा जा सकता है। भविष्य में सोने की पूरी रीसेल वैल्यू पाने के लिए आपको कई सालों तक किसी डीलर के पास जाने या एक सुरक्षित सोना ख़रीद खाता रखने की ज़रूरत नहीं है।

       

      4. ट्रेडिंग: फ़िजिकल गोल्ड के ट्रेडिंग की तुलना में डिजिटल गोल्ड में ट्रेडिंग करना ज़्यादा सुविधाजनक है। फ़िजिकल गोल्ड ख़रीदने या बेचने के लिए आपको एक दिन रुकना होगा और एक ज्वैलरी शॉप या बैंक में जाना होगा, जो कि समय लेने वाली और असुविधाजनक प्रक्रिया है। अगर आप सोना ख़रीदना चाहते हैं, तो आपके पास सोने का लॉकर भी होना चाहिए।

       

      दूसरी ओर, डिजिटल गोल्ड कभी भी, कहीं भी, कुछ सरल चरणों में ऑनलाइन ख़रीदा और बेचा जा सकता है। एक सफल बिक्री के बाद पैसा कुछ ही दिनों में सीधे आपके रजिस्टर्ड वॉलेट या बैंक खाता में ट्रांसफ़र हो जाता है।

       

      5. आप क्या भुगतान करते हैं: गोल्ड ज्वैलरी ख़रीदते समय आपको न केवल सोने की क़ीमत चुकानी पड़ती है, बल्कि मेकिंग चार्ज और अतिरिक्त टैक्स भी देना पड़ता है। ज्वैलर्स, आपके गहनों के डिजाइन के आधार पर 7% से 25% तक चार्ज करते हैं। अगर, चुनी गई ज्वैलरी में क़ीमती पत्थर और रत्न भी शामिल हैं, तो लागत बढ़ जाती है और इनका दाम भी सोने की क़ीमत में शामिल हो जाता है। जब आप सोने की ज्वैलरी को बेचने जाते हैं, तब आपको उन जड़े हुए गहनों के दाम नहीं मिलते या इसे जोड़ा नहीं जाता है।

       

      डिजिटल गोल्ड के ज़रिए आप केवल शुद्ध 24 कैरेट सोने का व्यापार करते हैं। आपकी ख़र्च की गई कुल राशि केवल सोने में इनवेस्ट की जाती है। ख़रीदारी करते समय आपको केवल 3% जीएसटी का भुगतान करना होता है।

       

      6. सुरक्षा: बहुत से लोग डिजिटल गोल्ड में इनवेस्टमेंट करने से हिचकते हैं, क्योंकि यह एक नया कॉन्सेप्ट है और उन्हें इस क्षेत्र में जानकारी भी कम है। लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है, इनवेस्टमेंट के विकल्प के रूप में डिजिटल गोल्ड सुरक्षित है। आपके अकाउंट में जमा हुआ हर एक ग्राम सोने पर वास्तविक फ़िजिकल गोल्ड सुरक्षित होता है। इसका मतलब है कि आपको किसी भी समय, किसी भी तरह का कोई जोखिम नहीं है।

      इस अंतर को बेहतर ढंग से समझने और निर्णय लेने में आपकी मदद करने के लिए यहां एक टेबल दी गई है:

       


      डिजिटल गोल्ड साफ़ तौर पर एक बेहतरीन विकल्प लगता है, लेकिन, यह वास्तव में इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने इनवेस्टमेंट से क्या चाहते हैं।

      डिजिटल और फ़िजिकल गोल्ड दोनों के अपने फ़ायदे और नुक़सान होते हैं। लेकिन, आप अपनी रीसर्च ज़रूर करें और समझें कि आपके लिए कौन-सा तरीक़ा बेहतर हो सकता है।

       

      डिजिटल गोल्ड बनाम फ़िजिकल गोल्ड: क्या डिजिटल इनवेस्टमेंट एक बेहतर इनवेस्टमेंट है?